हमीरपुर,
सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार अपने करीबी सहयोगियों और मित्रों के परिवारजनों के लिए नौकरी के दरवाजे पिछले रास्ते से खोल रही है, जबकि प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके हक से वंचित किया जा रहा है।
आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने सरकार के निर्णय को ‘कर्मचारी विरोधी’ करार देते हुए कहा कि 2003 के बाद अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को वरिष्ठता और आर्थिक लाभ से वंचित करना सरासर अन्याय है। उन्होंने सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों को अभी तक पंजाब वेतनमान के आधार पर एरियर का भुगतान नहीं किया गया है।

मेडिकल बिलों का अंबार और वित्तीय कुप्रबंधन
राजेंद्र राणा ने कहा कि पेंशनरों और कर्मचारियों के मेडिकल बिल पिछले दो सालों से लंबित पड़े हैं, और सरकार ने इन्हें निपटाने के बजाय कर्ज लेकर घी पीना जारी रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश को आर्थिक दिवालियापन की ओर धकेल रही है और खजाने को अपने मित्रों और उनके संबंधियों पर लुटाकर इसे अपनी उपलब्धि मान रही है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि बिना किसी ठोस उपलब्धि के सुक्खू सरकार दो साल का जश्न मना चुकी है। जनता के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता का अभाव स्पष्ट है। प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ ऐसा अन्याय हिमाचल के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। और कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि पेंशनरों को पेंशन का भुगतान 10 तारीख को किया गया हो और कर्मचारियों को पहली तारीख की बजाय 5 तारीख को वेतन दिया गया हो।
राजेंद्र राणा ने कहा कि सरकार की इस कर्मचारी विरोधी नीति और भाई-भतीजावाद के खिलाफ पूरी तरह आवाज बुलंद की जाएगी और जनता के बीच सरकार को बेनकाब किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभ जारी करे और प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जिम्मेदार कदम उठाए।
Author: Himachal Samvaad







