दियोटसिद्ध मंदिर भ्रष्टाचार मामले मे भड़के महंत राजेंद्र गिरी,मंदिरों को लेकर आए हाईकोर्ट के फैसले का किया स्वागत

हमीरपुर,

देव भूमि हिमाचल में सरकारी नियंत्रण में चल रहे मंदिरों में फैले करप्शन के माहौल पर अंकुश लगाने के लिए हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुये बाबा बालक नाथ मन्दिर ट्रस्ट दियोटसिद्ध के महंत श्रीश्रीश्री 1008 राजेंद्र गिर ने कहा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से मन्दिरो में फैली करप्शन पर लगाम लगेगी
महंत श्री ने अपने आवास पर पत्रकारों को सम्बोधन देते हुए कहा कि खोट सिस्टम की कारगुजारी में कर्मचारी तो उनके आदेश के पालक है उनका दोष नहीं है जो अधिकारी कहंगे कर्मचारी करंगे यह स्वाभाविक है महंत बोले अराजकता व मनमानी के माहौल में सिस्टम ने मंदिर एक्ट को भी लगातार नजर अंदाज करते हुए मन मुताबिक कारगुजारी जारी रखी है उहोंने कहा कि मंदिरों में Has से कम स्तर की नियुक्ति न हो ताकि चढ़ावे का दुरुपयोग पर नियंत्रण हो सके।चढ़ाबे के धन का 90 फीसदी हिस्सा मन्दिर एक्ट के मुताविक श्रद्धालु हित मे खर्च किया जाये । उहोंने कहा कि वह
किसी ट्रस्ट के विरोध में नही हैं लेकिन मंदिरों में करप्शन के सख्त खिलाफ है महंत बोले अगर श्रद्धालु हित मे वह नहीं बोलेंगे तो बोलेगा कौन? और अगर श्रद्धालु हितों में बोलना उनकी सुबिधाओं की पैरवी करने को ट्रस्ट के सिस्टम बिरोध मानते है तो फिर वह ऐसा विरोध लगातार करेंगे व ज़रूर करंगे! इसके लिए चाहे उन्हें किसी भी स्तर तक ही जाना न पड़े। महंत श्री ने कहा कि बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट मे पिछले कई सालों से सरकारें स्थाई मंदिर अधिकारी की नियुक्ति तक नहीं कर पाई है, करोड़ों के चढ़ाबे बाले धार्मिक स्थल पर अस्थाई मंदिर अधिकारी व्यवस्थाओं के देख रहे है! ऐसे मे यहाँ भ्रष्टाचार होना स्वाभाविक है! उन्होंने कहा कि मै पिछले एक दशक से मांग कर रहा हूं कि अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को चलाने के लिए एचएएस या फिर आईएएस अधिकारीयों की जरूरत है ताकि श्रद्धांलुओं के हितों के साथ मंदिर के विकास को गति मिल सके! महंत ने कहा धार्मिक स्थलों मे आए दिन भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है इसके पीछे कर्मचारी दोषी नहीं है बल्कि व्यवस्था के मालिकों के प्रबंधन मे कमी है! उन्होंने कहा कि मंदिर की अव्यवस्थाओं को कई बार सुझाब दिए जाते है लेकिन अधिकारीयों के आपसी तालमेल की वजह से सुधार तो दूर यहाँ आए दिन नए नए घोटाले हो रहे है! महंत आवास प्रशासन हमेशा इन अनियमिताओं के खिलाफ रहा है और आगे भी रहेगा! उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि इससे पूर्व रहे अधिकारीयों ने बेहतर काम नहीं किया जिन्होंने किया वह तालमेल से किया और हमने हमेशा उनके बेहतर कार्यों की प्रशंसा की है! महंत बोले अब समय आ गया है कि सरकार मंदिरों की जिम्मेदारी एचएएस या फिर आईएएस लेवल के अधिकारीयों के हाथों मे दे ताकि यहाँ श्रद्धांलुओं की आस्था बनी रहे और मंदिर के हर काम मे पार्दर्शिता रहे