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दुगनेहड़ा: हिम अकादमी पब्लिक स्कूल, दुगनेहड़ा में संस्कृत दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति
रुचि, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान तथा नैतिक मूल्यों की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती विनिता गुप्ता जी के मार्गदर्शन एवं
उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा में दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना, विद्यार्थियों के भाषण, भगवद्गीता के
श्लोकों का उच्चारण तथा संस्कृत भाषा के महत्व पर विचार-विमर्श जैसी विविध गतिविधियाँ शामिल रहीं।कार्यक्रम का
शुभारंभ कक्षा सातवीं की छात्राओं कृतिका एवं आराध्या द्वारा दीप प्रज्वलन मंत्र के साथ किया गया। इसके पश्चात
विद्या एवं ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्कृत
भाषा की समृद्ध विरासत, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा जीवन में नैतिक मूल्यों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत
किया।कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों निश्चल एवं अन्य विद्यार्थियों ने संस्कृत दिवस एवं संस्कृत भाषा के महत्व पर अपने
विचार व्यक्त किए। इसके बाद कक्षा आठवीं की छात्राओं अनिका एवं निकुंज द्वारा भगवद्गीता के श्लोकों का भावपूर्ण
उच्चारण किया गया। कक्षा दसवीं के विद्यार्थी अक्षित ने संस्कृत भाषा के महत्व एवं वर्तमान समय में इसकी
प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। कक्षा छठी की छात्राओं गौरी एवं आइजा ने नैतिक मूल्यों पर आधारित
संस्कृत श्लोक प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को अपने जीवन में सदाचार एवं सकारात्मक मूल्यों को अपनाने का संदेश
दिया।कार्यक्रम में विद्यालय के संस्कृत शिक्षक श्री संदीप शर्मा ने भी संस्कृत दिवस के महत्व तथा संस्कृत भाषा की
उपयोगिता पर प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत की समृद्ध परंपरा से जुड़ने तथा इसके
संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या श्रीमती विनिता गुप्ता जी को
अपने बहुमूल्य विचार एवं आशीर्वचन प्रदान करने हेतु आमंत्रित किया गया।संस्कृत दिवस का यह आयोजन
विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ने का प्रेरणादायक अवसर रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया
कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर है।
Author: Himachal Samvaad












